आखिर ठेकेदार के किस गलती के कारण सोनभद्र विद्युत विभाग हो रहा बदनाम ?

आखिर ठेकेदार के किस गलती के कारण सोनभद्र विद्युत विभाग हो रहा बदनाम ?


ठेकेदार की लापरवाही से महीनों बाद भी विद्यालय की बाउंड्री से बाहर नहीं हट सका ट्रांसफार्मर। 



सोनभद्र। जनपद के करमा ब्लाक अन्तर्गत सुकृत पावरहाउस 33/11 उपकेंद्र अन्तर्गत हरैया फीटर पर प्राथमिक विद्यालय नौडिहवा (लोहरा) के बाउंड्री में स्थित ट्रांसफार्मर को हटाने का कार्य लगभग कई महीनों से चल रहा है लेकिन आज तक नहीं हट पाया। 



महिनों से चल रहा कार्य खत्म होने का नाम नहीं ले रहा -

सोनभद्र विद्युत विभाग की उदासीनता से एक कहावत 'हवा में हल चलाना' और 'मुंह मियां मिट्ठू बनना' चरितार्थ हो रहा। पूरा मामला दिसंबर 2025 से प्रारंभ होकर मई 2026 तक का है। जी हां प्राथमिक विद्यालय नौडिहवा (लोहरा) के ग्राउंड से ट्रांसफार्मर सहित हरैया फीटर वाला ग्यारह हजार का नंगा तार हटाने के लिए लाखों रुपए पास हुआ और ठेकेदार द्वारा तत्काल काम लगाने के लिए सीमेंट पोल (खंभा) लाकर विद्यालय के ग्राउंड में रख दिया गया जो कि बहुत दिन पड़ा रहा। ज्यादा दिन तक नीचे पड़े खंभे को लगाने के लिए क्षेत्रीय लोगों ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से फोन के जरिए शिकायत की गई, जिसके तुरंत बाद दो जनवरी 2026 को ठेकेदार द्वारा कुछ खंभे बाहर गड़वा दिया गया और अपने से अपनी पीठ थपथपाया गया तथा अपनी ही बड़ाई की गई, मानो अब काम खत्म हो ही जाएगा। लेकिन उसके बाद पूरा जनवरी बीत गया और ठेकेदार साहब इस काम को लेकर गहरी निद्रा में सो गये। धीरे धीरे अप्रैल भी बीत गया। 30 अप्रैल 2026 को संबंधित अधिकारी से इसके बारे में जानकारी ली गई तथा कार्य को यथाशीघ्र पूर्ण करने की अपील की गई, जिसपर संबंधित अधिकारी द्वारा ठेकेदार से बात की गई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक ठेकेदार ने 3 मई 2026 को कार्य शुरू करने की बात कही। लेकिन तीन तो दूर चार मई को भी यह कार्य नहीं प्रारंभ किया गया और अपने अधिकारी की आदेश को ठुकरा दिया गया। यदि सौ बात की एक बात कहें तो लगभग छः महीने होने को हैं लेकिन अभी तक एक ट्रांसफार्मर को विद्यालय के ग्राउंड व बाउंड्री से बाहर नहीं करवाया जा सका। 


अधिकारियों के आदेश को जूते की नोक पर रखते हैं ठेकेदार - 

यह कहना तब लाजिमी हो जाता है क्योंकि लगभग 6 महीने से विद्युत विभाग के संबंधित अधिकारी द्वारा ठेकेदार को यह कार्य पूर्ण करने के लिए सैकड़ो बार कहा गया लेकिन ठेकेदार द्वारा अपने ही अधिकारियों के आदेशों को जूते की नोक पर रखा गया तथा कार्य को पूर्ण नहीं कराया गया। वहीं लोगों का कहना है कि ऐसे लापरवाह ठेकेदारों को जिम्मेदारी ही क्यों दी जाती है जो की किसी भी कार्य को समय से नहीं करता है तथा अधिकारियों सहित सरकार की भी छवि को धूमिल करने का प्रयास करता है। 


सरकारी धन के बंदरबांट का लग रहा आरोप-

लोगों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा की गई यह मनमानी के लिए सिर्फ वही जिम्मेदार नहीं है बल्कि इसमें विद्युत विभाग के समस्त अधिकारी भी जिम्मेदार है साथ ही में लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी धन का बंदरबाट खूब किया जा रहा है अगर ऐसा नहीं होता तो ठेकेदार की इतनी मजाल की छह - छह, सात-सात महीने तक कार्य को पूर्ण न करें। लोगों का कहना है कि यदि समय - समय से संबंधित अधिकारी अधूरे पड़े कार्यों की समीक्षा करते तथा लापरवाही के एवज में ठेकेदार को नोटिस जारी करते तो इतने लंबे समय तक कोई भी कार्य अधूरा नहीं रहता।

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